ओरछा ,orchha (मध्यप्रदेश) 

मुकेश पांडेय जी द्वारा

ओरछा का राजमहल रात मे
बेतवा नदी व बुंदेली राजाओ की छतरीयां

आज में आप के सामने उस जगह का वर्णन कर रहा हूं, जहां पर जाने की मुझे बहुत ज्यादा जिज्ञासा थी। आज से तकरीबन चार साल पहले जब मैं ग्वालियर घूमने के लिए गया था। तब मुझे ओरछा के बारे में पहली बार पता चला। वहां पर मैने ओरछा की कई तस्वीरें देखी, जिनको देखकर में लगभग मोहित हो गया था। इन तस्वीरों में से एक तस्वीर में बेतवा नदी में रीवर राफ्टिंग करती बोट व पीछे बुंदेली छतरीयो को दर्शाया गया था। तभी से मेरे मन मे ओरछा की एक तस्वीर बन गयी और मैंने उसी दिन यह तय कर लिया कि एक बार ओरछा जरूरः जाना है। फिर मैं एक वाट्सएेप ग्रुप घुमक्कड़ी दिल से जुड़ा। उसी ग्रुप में कुछ दिन बाद ओरछा के रहने वाले श्री मुकेश पांडेय जी (अाबकारी निरीक्षक) जुड़े। उनसे दो तीन दफा अोरछा के बारे में बात भी हुई। फिर कुछ दिन बाद घुमक्कड़ी दिल से ग्रुप का एक महा मिलन कार्यक्रम ओरछा में रखा गया। जहां लगभग सभी सदस्य आए। उसी में शामिल होने व अपनी मनपसंद जगह घूमने के लिए मैं भी ओरछा गया। ओरछा जितना सुंदर तस्वीरों में दिखता है, यह सच में उससे भी बहुत सुंदर है। सुंदर कलाकृतियों का गढ़ है ओरछा। अोरछा मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले में स्थित है। ओरछा की हर पुरानी इमारत एक कहानी कहती है। चाहे वो राजा मधुकर शाह और रानी गणेश कुँवर की हो या फिर स्थानीय देवता हरदौल की। एक कहानी राजसी नृत्यांगना राय प्रवीण की भी है जिसे राजकुमार इंद्रजीत सिंह प्यार करते थे लेकिन उनकी यह कहानी भी अधुरी रह गई। हर कहानी सुनने में बडी दिलचस्प है, जिसे सुनते सुनते आप उस काल में पहुंच जाने का अनुभव करेंगे। अोरछा के सबसे निकटतम शहर झांसी है। ओरछा में देखने व जानने के लिए बहुत कुछ है। एक घुमक्कड या पर्यटक यहां आकर निराश नही होता।

1- ओरछा क्यो जाए?
@ ओरछा का इतिहास बहुत पुराना है। ये बुंदेलों की राजधानी हुआ करती थी। झांसी और ओरछा बहुत पास पास भी है। ओरछा में आप पुरानी इमारतों को देख सकते है। साथ मे जंगल सफारी का आनंद भी उठा सकते है। बेतवा नदी में रिवर राफ्टिंग भी यहाँ होती है। कई प्राचीन मंदिर भी यहां बने है, जिनको देखने आप जा सकते है। और भगवान राम का प्रसिद्ध राम राजा मन्दिर भी यहां है जहां आज भी भगवान राम को राजा के रूप में पूजा जाता है।

2- ओरछा में क्या क्या देखे?
@ओरछा में आप ओरछा का महल, जहाँगीर महल, चतुर्भुज मन्दिर, ओरछा का राम राजा मन्दिर, हरदौल की बैठक, सावन भादो मिनार, बेतवा नदी व रिवर राफ्टिंग, बेतवा नदी के किनारे बनी बुंदेली राजाओ की छतरीयां( समाधी)। साथ में आप ऐतिहासिक व धार्मिक प्रष्ठ भूमी ओरछा की गौरव गाथा सुनने व देखने जा सकते है। आप यहां आकर निराश नही होगे।

3- ओरछा कैसे आए व कहां ठहरे?
@ आप ओरछा यातायात के तीनो साधनो से आ सकते है। अगर आप हवाई जहाज से आ रहे है तो नजदीकी हवाई अड्डा ग्वालियर है जो ओरछा से तकरीबन 125 किलोमीटर की दूरी पर है। अाप रेल के माध्यम से भी आ सकते, आपको झांसी रेलवे स्टेशन उतरना होगा। ओरछा से झांसी केवल 19 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। सडक मार्ग से आप ग्वालियर, दतिया, झांसी होते हुए ओरछा पहुंच सकते है। ओरछा में ठहरने के लिए कई होटल है।

4- अोरछा कब आना चाहिए?
@ वैसे तो आप पूरे साल ओरछा जा सकते है। लेकिन सर्दीयो में ओरछा घुमना सही रहता है क्योकी आप गर्मी से परेशान नही होगे और घुमने का पूरा आनंद लेंगे। वैसे आप बारिश के दौरान भी ओरछा आ सकते है क्योकी इस समय ओरछा में बहुत हरियाली होती है।

5- ओरछा के आसपास और क्या देख सकते है?
@ ओरछा के आसपास आप ग्वालियर शहर जा सकते है।जहां आप सिंधिया पैलेस व ग्वालियर का किला साथ में बहुत सी जगह घुम सकते है। ओरछा के नजदीक झांसी शहर भी है, जहां आप महारानी लक्ष्मीबाई का किला व म्यूजियम भी देख सकते है। ओरछा से आप दतिया भी जा सकते है जहां आप कई किले व पीताम्बरा माता के दर्शन भी कर सकते है।

गनेश द्वार
चतुर्भुज मन्दिर ,ओरछा

राजा राम मन्दिर रात में

राम राजा मन्दिर

मुकेश पांडेय द्वारा
चतुर्भुज मन्दिर के ऊपरी तल पर
वन विहार ओरछा
हम घुमक्कड़ दोस्त
शाम को बेतवा नदी
बेतवा नदी

ओरछा का महल

रिवर राफ्टिंग ( मुकेश पांडेय जी)

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